जब सम्पूर्ण विश्व कोरोना महामारी की चपेट में था, उस समय मानवता की रक्षा और सेवा के लिए अनेक संत, संस्थाएँ और समाजसेवी सामने आए। उन्हीं में से एक नाम है – परम पूज्य युगद्रष्टा, राष्ट्रसंत श्री इन्द्रदेवजी महाराज का, जिन्होंने वृंदावन सहित विभिन्न स्थानों पर निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सहायता और राहत सेवाएं प्रदान कीं है।
कोविड-19 की भयावह स्थिति में जब लोग अपनों से दूर हो रहे थे, इलाज की व्यवस्था टूट रही थी और अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही थी, तब पूज्य गुरुदेव ने वृंदावन में "निःशुल्क चिकित्सा
सेवाएं प्रदान कीं।
दवाइयों एवं पौष्टिक आहार का वितरण
गुरुदेव के निर्देश पर विशेष आयुर्वेदिक काढ़ा, इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाइयाँ, होम्योपैथिक मेडिसिन, विटामिन सप्लीमेंट्स आदि का वितरण नियमित रूप से किया गया। साथ ही, बीमार एवं जरूरतमंद लोगों को पौष्टिक भोजन, फल, दूध एवं अन्य आवश्यक सामग्रियाँ उनके घर तक पहुँचाई गईं।
उपचार के समय परीक्षित और सदियों पुराने प्राकृतिक तरीके, आयुर्वेद ने सिखाया है कि हमारे सिस्टम में किसी भी बीमारी की उपस्थिति को हमारे 'दोषों' में असंतुलन के रूप में इंगित किया जाएगा। हमारे शरीर को ठीक करने और अच्छे स्वास्थ्य में रखने की कुंजी दोषों को संतुलित करना और शरीर प्रणाली में संतुलन वापस लाना है। आयुर्वेद के सिद्धांत रोगों का निदान करने और शरीर में संतुलन वापस लाने के प्राकृतिक तरीके का पालन करते हैं।